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श्री राम दत्त जोशी - संजिया


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हे.... सूनी लिये हो एड़ी देबा तू सांजै की संजिया।
साँजै की संजिया होलि पै तुमारा नामैकी।
जैको नामा औ सूनी होलो पैं बैकुण्ठे को बासा,
जैको नामा ला सूनी बेर पैं आमद चूनांलै हे...।
षिबलोका लै तरालै देवा पै आमद चुमांलै हे...।
सूनी लिए ओ ऐड़ी राजा
तू सांजैकी संजीया जैको नामा
औ सुनी पैं देवा काना पवित्रा हो।
आंखाँ की गाजली देवा पैं, तरी खुलि हो जाली,
हे देबा पै तेरी खूली जाली, स्थानौ आलो तेरो ओ आँची हो धूला...।
मांटी ना को स्यालो आला हो तेरी पऊना की धूला।
रूमानी-झूमानि ओ देवा पैं संजिया झुलि हो आंछ।
ओ रथी का रथ देवा पैं पष्चिम न्हैई ग्यानां।
पछीमां का छैला हो देवा पुरबा लौटी हो ग्याना पछीमां का देष हो
नारायना संजिया झूली आंछ।
डीणी-कांणी देवा बठी पै संजिया झुलि हो आंछ।
डीणी ना बठी पै हो देवा संजिया झुलि आंछ,
गाड़ ना गधेेरी बठी वो संजिया झुलि आंछ।
गाई, गौ पूछा हो बठी संजिया झुलि आंछ, 
रूमनी-झुमनी आंगे हो संजिया भीडि़ ना आंगना भीडि़ ना बैठनी
संज्या लीलेछ बैठाक, मन में संजिया माता करैछ विचारा।
कैका घर ओ होली कौली संज्या, सुलक्षणी हो नारी। 
कैका घरा होली माया, कुलक्षणी नारी,
यो माया वो संजिया माया पै सत् हेरी हो ले ली,
हीटनी धुमनी माया पैं कुलछिणी हो।
घर कुलछणी नारी ओ देबा पैं बन बठि हो घर,
बन बठी हो घर बन बठी कुलछिणी नारी घर आई हो गैछ,
गैछ कुलछिणी नारी का तो पै किया समाचार हो।
बन बठे आली नारी यो द्यौरानी जेठानी हो।
द्यौरानी-जेठानि संग नारी कजिया जो करैछ हो।
बाला कै रूवाली नारी यो बूढ़ा कै पित्या ली हे।
पड़नि संजिया जो कुलहिनी घुमाली चकिया जो,
ओडि़ना कोडि़ना, झाड़-झाड़ी नंगी झांका करी बेरा
नारी देली मैं जो बैठली।
कुरूका लगा मी नारी यो सूनूं कै मराली,
यो संजिया माया नारी, माया समझन लागैछ हो।
सुन नारी तू कुलछीणा नारी तू सुन मेरी बाता हे....।
पड़नी संजिया नारी तू दियड़ी जो जगाली हो
तैबखत नारी तू दीयड़ी जगाली,
तिल सारी तेल चांछ नारी, रूवा सारील बाती हो,
अगर दीयड़ी लाली तो साली का अक्षता हे...।
कुलछीणा नारी देबा पै की भाका जो बुलांछी हो।
तील सारी तेल हुनौ मैं स्योंनी में लगोंनी हे,
पूना सारा रूवा हुना मैं खातड़ी जो बनौनू हो।
साली का चांवला होला मैं भात पकां खौला हे।
कुलछीणी नारी का तो देबा इना सा लक्षणा हो,
कुलछीणा नारी संध्या यो देली फिरी ठकारा हे..।
जन मिलो जनमिलो उ नारी पती को सिंगारा।
कोई जन मिलो कुलछीनी अन्न को भनारा।
सात कुला पितरा त्यारा पै नरगा नसि हो जाला।
दुख-दरी दो तैका धर हो पै भरी जांछो।
सुखना संपत माया पै हरीजो लीज्यांछ।
हीटनी-रीटनी संज्या पैं सुलछीनी घर,
हीटनी घुमनी संज्या न्है गै वो सुलछीनी घर।
ओ सुलच्छिना नारी बन है घर आई गैछ़।
घर आई बेर उ नारी हाथा पांव ध्वैली,
हाथा पैरा धोई नारी पै पकड़ दीवाड़ी।
पकड़ दीवाड़ी हेरो पूना सारी बत्ती।
पूना सारी बाति हो नारी हेरना फै गैछ।
तीला सारी तेल हो सुलछिना हेरना भै गैछ,
अपना मकाना नारी पै, दीयड़ी जगाली,
दीयड़ी जगालि सुलछिनी आरती लगाली,
अपना पतीकी उ नारी परिक्रमाकरि लेली,
चरण ध्वे बेर जल सिरमें खीतैली, द्यौरानी,
जेठानी संग नारी मिली जुलि हो रौली,
नगरा का लोगों कनी पैं हंसी खुशी हो रौली।
बूड़ा कै हसाली उ नारी पैं बाला कैं बोत्याली,
सारा सत्करली पैं पांना को अधारा, बेहा...
सुलछिना नारी देखि संज्या भौत खुषी मैछी बेहा।
सात कुला पितरा त्यारा बैकुण्ठा तरी जाला बेहा।
सुखन सम्पती नारी घर मरी देछ वेहा,
दुख दरीद्र तैको माया हरी जो लीगैछ वेहा,
तैई नारी देखी माया सन्ज्या मौत खुषी भैछी
बेहा तैको जीतौ वाला कौली माया बेहा,
त्वे नारी मीली जाओ जुग-जूग पति क श्रंगार वेहा।
जातिन संज्या पड़ी माया की पूजा करी लेछ
बेहा तब ना संजिया माता बाटुली चली गैछ।
रीटनी हीरनी माया पच्छि़मा का देषा,
पच्छि़मा का देष माया रथ रोकी लेछ।
पच्छि़मा को दिषा छीयो दैंत्यौ को देष,
तनरि दगाड़ा कियो माया लड़न तैयारी।
साथ्न रे माया तब लड़न-लड़न,
पच्छि़मा को दैंता त्वेले हारमान करो।
आजी ना संजिया मामा रथ बैठी गैछ,
रंगतै की लाल है गे धूल की पूसली।
जमुना का घाट माया ले रथ रोकी लेछ,
रथ रोकी माया ले पै नाई-धोई लेछ। 
धूलीना बगायो मायाले खून जो बगायो,
माया ना संजिया पै बाटुली चली गैछ।
हीटनी-घूम्नी माया पूख का दीषा,
पूखा का दीषा बैठी दीयड़ी जागी गैछ।
पूर्वा पून्या गिरी की दीयड़ी जागी गैछ,
उत्तरी हीमाला की दीयड़ी जागी गैछ।
तैंतीस करोड़ी देबतों की दीयड़ी जागी गैछ,
नैंनीताल नन्दादेवी दीयड़ी जागी गैछ।
पाताल हो भुवनेष्वर दीयड़ी जागी गैछ,
जागेष्वर जागनाथ दीयड़ी जागी गैछ।
आठाा सौई गंगाना की दीयड़ी जागी गैछो।
नौई सौ तीरपन की दीयड़ी जागी गैछ।
ओ माया संजिया तेरी दीयड़ी जागी गैछ,
हरीहरद्वार पौड़ी दीयड़ी जागी गैछ।
बदरी केदार की दीयड़ी जागी गैछ,
ओ माया संजिया की दीयड़ी जागी गैछ।
पाताल ओ भूवनेष्वर दीयड़ी जागी गैछ,
शैमज्यू सकल लिंग हो दीयड़ी जागी गैछ।
कूमूं नागेनाघ की दीयड़ी जागी गैछ,
याना ना पखान की दीयड़ी जागी गैछ,
फटकसीला ऐड़ी की दीयड़ी जागी गैछ।
देबीना मच्वाल की दीयड़ी जागी गैछ,
देघूरा मधा की पै दीयड़ी जागी गैछ।
कूटौली बरसिया गाजा की दीयड़ी जागी गैछ,
छड़ौजा वे नंगी दीयड़ी जागी गैछ। 
दोड़मा द्यौपड़ की दीयड़ी जागी गैछ,
हाटना कालीका की दीयड़ी जागह गैछ़।                   
भूलीया चुकिया देबौं की दीयड़ी जागी गैछ,
तीनताला धरती की दीयड़ी जागी गैछ,
भूलिया चुकियों की दीयड़ी जागी गैछ।
जीभी-भूमी दार की दीयड़ी जागी गैछ,
गौत्वाड़-मच्वाल की दीयड़ी जागी गैछ।
जाग-जाग दीयड़ी
तू मूलूका संसार जागन्ती रै
जावो तेरी ज्योती पूरी वो राती,
मूलूक-संसार में जागन्ती रैई जाये ।