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Home Classical Music T.P.Pandey Bhajans H

Tara Prasad Pandey sings Bhajans

 

Tara Prasad Pandey: vocals, harmoniumtppandey

Nirmal Pant: tabla

Devkinandan Joshi: tamboura 

Amarnath Batt: sitar 

Dinesh Chand Pande: violin


This
recording session took place one evening in December 1984 in a home in Lala Bazaar, Almora  

In the 1970 & 80s Tara Prasad Pandey was famous as a vocalist and musician through his  performances at Ram Lilas, classical and folk music concerts not only in Kumaon but also in Delhi, Jaipur, Kanpur, Ranpur and many other places. The musicians who accompany their guru on this recording were pupils of the music school he held in his home every morning from 05:30 till 08:30. He was born in Kunitala near Pithorogarh on 24.04.1929 and he received his musical training from a Mr Lalai, a school teacher, from Bengal. He was a lecturer in  Music at the Government Inter College Almora with a residence in Narain Tiwari Diwar (NTD), near Almora. 

 

 

 
 The recordings  presented here are Copyright © 2011 Jogesh Pandey/Ian Coulthard,  ℗  2011  Jogesh Pandey/Ian Coulthard. They may be  downloaded for personal use  only. Any unauthorised  broadcasting, public performance, copying or  re-recording will constitute an  infringement of copyright.
 English Version
1) मन पछितै है, अवसर बीते
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मन पछितै है, अवसर बीते।
मन पछितै है, अवसर बीते।
दुर्लभ देह पायी, हरि पद भजु।
चरम बचन उरू हीते ये।
मन पछितै है, अवसर बीते।
मन पछितै है, अवसर बीते।
सहस बाहु दस बदन आदि नृप।
बचे न काल बली तै।
सहस बाहु दस बदन आदि नृप।
बचे न काल बली तै।
हम - हम करी धन, धाम संवारे।
हम - हम करी धन, धाम संवारे।
अन्त चले उति रीते  - - - --
मन पछितै है, अवसर बीते।
मन पछितै है, अवसर बीते।
सुत बनि ताधि जानि सारथ।
न करूने है सब हीतै थे।
सुत बनि ताधि जानि सारथ।
न करूने है सब हीतै थे।
अन्तहु तौ हित जैगे पामर।
तू न तजे अब हीतै  - --ये।
मन पछितै है, अवसर बीते।
अब नाथ हि अनुराग जागुजड़।
त्याग दुरांशा जीते ये ये  - - - -
अब नाथ हि अनुराग जागुजड़।
बुझे न काम अग्नि तुलसी कहूँ।
बुझे न काम अग्नि तुलसी कहूँ।
विषय भोग बहु धीते ये ये  - - - -
मन पछितै है अवसर बीते।
मन पछितै है अवसर बीते।
दुर्लभ देह पायी हरि पद भजु।
चरम वचन अरू हीते ये।
मन पछितै है अवसर बीते।
अवसर बीते अवसर बीते।

 

 

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2) प्रभु जी अवगुन चित न धरो वो मोरे
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प्रभु जी अवगुन चित न धरो वो मोरे ।
अवगुन चित न धरो, वो प्रभु जी।
अवगुन चित न धरो वो मोरे।
समदरशी है नाम तिहारो, वो  -’ - - - -
समदरशी है नाम तिहारो
चाहे तो पार करो, वो मोरे।
अवगुन चित न धरो, प्रभु जी अवगुन।
चित ना धरो मोरे अवगुन चित।
एक नदिया एक नार कहावत।
एक नदिया एक नार कहावत।
मैलो हि नीर भरो वो।
एक नदिया एक नार कहावत।
मैलो हि नीर भरो।
जब मिल करके एक बरन भये।
जब मिल करके एक बरन भये।
सुर सरि करके एक बरन भये।
अवगुन चित न धरो वो मोरे।
अवगुन चित न धरो वो मोरे।
एक लोहा पूजा में राखत।
एक लोहा पूजा में राखत।
एक घर बधिक परो।
एक घर 
बधिक परो
यह दुविधा का रस नहीं जाने।
यह
दुविधा का रस नहीं जाने।
कंचन करत करो  - - - - - -
प्रभु जी अवगुन चित न धरो वो मोरे ।
वो मोरे अवगुन चित न धरो।
एक जीव एक
ब्रह्म कहावत।
एक जीव एक
ब्रह्म कहावत।
सूर श्याम जग रोये।
एक जीव एक
ब्रह्म कहावत।
अब की बैर मोहे पार उतारो।
अब की बैर मोहे पार उतारो।
नहीं प्रण जात करो, वो मोरे।
अवगुन चित न
धरो प्रभु जी।
अवगुन चित न
धरो, वो।
समदरशी है नाम तिहारो।
समदरशी है नाम तिहारो।
चाहे तो पार करो, वो मोरे।
अवगुन चित न धरो।
प्रभु जी अवगुन चित न धरो।

 

 

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3) भज मन राम चरन सुखदाई रे
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भज मन राम चरन सुखदाई रे  - - - - -
राम चरन सुखदाई  - - - - - --
भज मन राम चरन सुखदाई रे  - - - - - 2
जिन चरणन से निकली सुरसरी।
जिन चरणन से निकली सुरसरी।
शंकर जटा समाई  - - - - -
जटा शंकरी नाम परियो है।
जटा शंकरी नाम परियो है।
त्रिभुवन तारन आई ।
भज मन राम चरन सुखदाई।
भज मन राम चरन सुखदाई।
जिन चरनन की चरण पादुका।  - - - -  आ।
जिन चरनन की चरण पादुका।
भरत लहो लब
लीनो
सोई चरन केवट धोय ली ने।
तब हरि नाव चलायी।
भज मन राम चरन सुखदाई।
भज मन राम चरन सुखदाई।
सोई चरन संतन जन सेवत।
सोई चरन संतन जन सेवत।
सदा रहत सुखदाई।
सोई चरन
संतन जन सेवत।- - -2
सोई चरन गौतम
ऋषि नारी।
सोई चरन गौतम
ऋषि नारी।
परसी परम पद पायी।
भज मन राम चरन सुखदाई।
भज मन राम चरन सुखदाई।
दण्डक बन प्रभु पावन कीन्ही।
दण्डक बन प्रभु पावन कीन्ही।
ऋषियन त्रास मिटायी।
सोई प्रभु त्रिलोक के स्वामी।
सोई प्रभु 
त्रिलोक के स्वामी।
कलक मृगा संग धाई ।
भजमन राम चरन सुखदाई।
भजमन 
राम चरन सुखदाई।
कपि सुग्रीव बन्धु भये व्याकुल
कपि सुग्रीव बन्धु भये
व्याकुल
तिन जय छत्र पिराई ।
रिपु का अनुज विभीषण निशिचर।
रिपु का अनुज विभीषण निशिचर।
सत लंका पायी।
भजमन राम चरन सुखदाई ।
शिव सनकादिक अरू ब्रमादिक।
शिव सनकादिक अरू ब्रमादिक।
शेष सहस्त्र मुख काई ।
शेष सहस्त्र मुख काई ।
तुलसी दास मारूत सुत की प्रभु।
भजमन राम चरन सुखदाई ।
चरण सुखदाई , चरण सुखदाई ।

 

 

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4) जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे?
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जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे।
जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे।
काको नाम पतित पावन जग।
काको नाम पतित पावन जग।
केहि अति दीन पियारे। 
केहि अति दीन पियारे। 
जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे।
जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे।

कौन देव बराई विरद हित।
कौन देव बराई विरद हित।
हटि - हटि बराई विरदे हित।
खग - मृग व्याध पशान,
विटप जड़ - जड़।
खग - मृग व्याध पशान,
विटप जड़ - जड़।
जवन कवन सुर तारे।
जवन कवन सुर तारे।
जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे।
जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे।

देव दनुज मुनि नाग मनुज सब।
देव दनुज मुनि नाग मनुज सब।
माया विवश विचारे।
तिनके हाथ दास तुलसी प्रभु।
कहा आपन पौ थारे  - थारे।
जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे।
जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे।

काको नाम पतित पावन जग।
काको नाम पतित पावन जग।
केहि अति दीन प्यारे।
केहि अति दीन प्यारे।
जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे।
चरन तुम्हारे  - चरन तुम्हारे।
जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे।
चरन तुम्हारे - चरन तुम्हारे।
जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे।
जाऊँ कहाँ तजि चरन तुम्हारे।

 

 

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5) सुमिरन कर ले मोरे मना।
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सुमिरन कर ले मोरे मना।
सुमिरन कर ले मोरे मना।
सुमिरन कर ले मोरे मना।
तेरी जात उमर हरि नाम बिना।
सुमिरन कर ले मोरे मना।
कूप नीर बिन, धेनु चीर बिन।
कूप नीर बिन, धेनु चीर बिन।
मन्दिर दीप बिना आ  - - - -
मन्दिर दीप बिना।
जैसे तरूवर फल बिन हीना।
जैसे तरूवर फल बिन हीना।
तैसे प्राणी हरि नाम बिना।
सुमिरन करले मोरे मना।
तेरि जात उमर हरि नाम बिना।
सुमिरन कर ले  - - - - -

देह नैंन बिन, रैंन चन्द्र बिन।
देह नैंन बिन, रैंन चन्द्र बिन।
धरती मेघ बिना आ  - - - -
धरती मेघ बिना आ  - - - -
जैसे पंडित बेद बिहीना।
जैसे पंडित बेद बिहीना।
तैसे प्राणी हरि नाम बिना।
तैसे प्राणी हरि नाम बिना।
सुमिरन कर ले मोरे मना।
तेरी जात उमर हरि नाम बिना।
तेरी जात उमर हरि नाम बिना।
सुमिरन कर ले मोरे मना।

काम क्रोध मद लोभ निहारे।
काम क्रोध मद लोभ निहारे।
छांण दे तू अब संत जना।
छांण दे तू अब संत जना।
कहे नानक सा सुन भगवन्ता।
कहे नानक सा सुन भगवन्ता।
यह जग में नहीं कोई अपना।
यह जग में नहीं कोई अपना।
सुमिरन कर ले मोरे मना।
तेरी जात उमर हरि नाम बिना।
सुमिरन कर ले मोरे मना।
सुमिरन कर ले मोरे मना।
तेरी जात उमर हरि नाम बिना।
तेरी जात उमर हरि नाम बिना। 

 

 

 

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6) चलो मन गंगा जमुना तीर
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चलो मन गंगा जमुना तीर।
चलो मन गंगा जमुना तीर।
चलो मन गंगा जमुना तीर। 2
गंगा जमुना निर्मल पानी।
गंगा जमुना निर्मल पानी।
सीतल होत शरीर।
चलो मन गंगा जमुना तीर।
चलो मन गंगा जमुना तीर।
ग्वाल  - बाल सब गवै चरावत।
ग्वाल  - बाल सब गवै चरावत।
संग लिये बलवीर।
चलो मन गंगा जमुना तीर।
चलो मन गंगा जमुना तीर।
चलो मन गंगा जमुना तीर। 2
मोर मकुट पीताम्बर सोहे पीताम्बर सोहे।
पीताम्बर सोहे, मोर मुकुट पीताम्बर सोहे।
कुण्डल झलकत हीरे।
चलो मन कुण्डल झलकत
हीरे
चलो मन कुण्डल झलकत
हीरे
चलो मन गंगा जमुना तीर।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर।
मीरा के
प्रभु गिरधर नागर।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर।
गिरिधर नागर, गिरिधर नागर।
मीरा के प्रभु 
गिरधर नागर। - -2
चरण कमल पर सीर।
चलो मन गंगा जमुना तीर।
चलो मन गंगा जमुना तीर।
चलो मन चरन कमल पर सीर।
चलो मन 
गंगा जमुना तीर। - -2
गंगा जमुना निर्मल पानी।
गंगा जमुना निर्मल पानी।
सीतल होत शरीर।
चलो मन सीतल होत शरीर।
चलो मन गंगा जमुना तीर।
गंगा जमुना गंगा जमुना।
गंगा जमुना तीर। 
चलो मन गंगा जमुना तीर।

 

 

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7) अब में नाचू बहुत गोपाल
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अब मैं नाचू बहुत गोपाल। 2
काम क्रोध को पहिर चलू ना।
कंठ विषय हिमाल।
अब
मैं नाचू बहुत गोपाल।

महामोह के नुपूर बाजत।
महामोह के नुपूर बाजत।
निन्दा सब दरसाये।
महामोह के नुपूर बाजत।
निन्दा सब दरसाये।
भरम भरयो मन भये पखावज।
भरम
भरयो मन भये पखावज।
चलत कुसंगत चाल।
अब
मैं नाँचू बहुत गोपाल।

तिृष्णा नाद करत घट भीतर।
तिृष्णा नाद करत घट भीतर।
नाना बिधि दैंताय।
माया को कटि फैटा बांध्यो।
लोभ तिलक दें माँथ।
अब
मैं नाँचू बहुत गोपाल।
कोटिक कला कौचिक दिखलाई ।
कोटिक कला कौचिक दिखलाई ।
जल चल सुधि नहीं ताल।
जल चल सुधि नहीं ताल।
सूरदास की सबै अविधा।
दूर करो नन्दलाल।
अब
मैं नाँचू बहुत गोपाल।
अब
मैं नाँचू बहुत गोपाल।
नाँचू बहुत गोपाल।
नाँचू बहुत गोपाल।

 

 

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8) झीनी रे झीनी राम रस दीन्हीं चदरिया
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झीनी रे झीनी राम रस दीन्हीं चदरिया।
झीनी रे झीनी 
वो तो राम - नाम रस दीन्हीं चदरियां
झीनी रे झीनी।
काहे को ताना काहे को भरनी।
कौन पार से दिन्ही।
इंग्ला - पिगला ताना भरनी।
इंग्ला - पिगला ताना भरनी।
सुसुमर तान से दीन्हीं चदरिया।
झीनी रे झीनी रे
वो।राम - नाम रस दीन्ही चदरिया।
झीनी रे झीनी
राम रस दीन्हीं चदरिया।
अष्टकवल दल चरखा डोले  - - - -2
पाँच तत्व गुन तीनी  - - - -----
सांई को सीयत दस माँस लागे।
सांई को सीयत दस माँस लागे।
ठोक - ठोक कर दीन्हीं चदरिया।
झीनी रे झीनी
कि वो राम नाम रस दीन्हीं चदरिया।
झीनी रे झीनी 
राम रस दीन्हीं चदरिया।
सो चादर सुर नर मुनि ओढ़ी।
ओढ के मैली कीन्ही ई  - -  - -
सो चादर सुर नर मुनि ओढ़ी।
ओढ के मैली कीन्हीं  - - - - -
दास कबीर जतन से ओढ़ी।
दास कबीर जतन से ओढ़ी।
दास कबीर जतन से ओढ़ी।
ज्यों की त्यों धर दीन्हीं चदरिया।
झीनी रे झीनी कि वो राम 
नाम रस दीन्ही चदरिया।
झीनी रे झीनी।
झीनी रे झीनी, झीनी रे झीनी।

जानकी नाथ सहाय कर तब ।
जानकी नाथ सहाय कर तब ।
कौन बिगाड़ करे नर तेरो।
सूरज मंगल सोम भृगु सुद।
बुध और गुरू बरदायक तेरे।
राहु केतू की नाहिं गम्यता।
राहु केतु
की नाहिं गम्यता।
संग शनिश्चर होत।

जानकी नाथ सहाय कर तब।
कौन बिगाड़ कर नर तेरो।
जानकी नार
सहाय कर तब।

दुष्ट दुशासन विमल द्रोपदी। 2
चीर उतारकु मंत्र तेरो।  2
जाकि सहाय करी करूणानिधि।  2
बढ़ गयो चीर को भार घनेरो। 2
जानकी नार सहाय कर तब ।
कौन बिगाड़ करे नर तेरो।
जानकी नार
सहाय कर तब।

गर्भ में राख्यों, परिक्षित राजा। 2
अस्वथामा जब अस्त्र प्रेरो।  2
भारत में मरूही को अण्डा। 2
ता पर बृज का घण्टा तेरो। 2
जानकी नार सहाय करे।
कौन बिगाड़ करे नर तेरा।
जाकि सहाय करि करूणानिधि।
जाकि सहाय करि करूणानिधि। 2
ताके जगत में भाग बढ़े रे।
ताके जगत
में भाग बढ़े रे।
रघुवंशी सन्तन सुखदाई।
तुलसी दास चरणन को तेरो।
जानकी नार सहाय करे

 

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9) पायो जी मैंने राम रतन धन पायो
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पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरू।
वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरू।
कृपा करि अपनायो।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
सत की नाव खेवैया सतगुरू।
सत की नाव खेवैया सतगुरू।
भवसागर तरि आयो।
पायो जी मैंने, भवसागर तरि आयो।
पायो जी मैंने, भवसागर तरि आयो।
जनम  - जनम की पूजी पायी।
जनम   - जनम की जनम  - जनम की।
जनम  - जनम की पूजी पायी।
जग में सभी खोवायो।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर।
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर।
गिरिधर नागर, हरसि  - हरसि यस गायो।
पायो जी मैंने हरसि  - हरसि यश पायो।
पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।
राम रतन धन  - राम रतन धन।
राम रतन धन पायो पायो जी मैंने।
राम रतन धन पायो, राम रतन धन।
राम रतन धन पायो,
राम रतन धन। 

 

 

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10) रघुबर तुमको मेरी लाज
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रघुबर तुमको मेरी लाज।
रघुबर तुमको मेरी लाज।
सदा  - सदा में शरण तिहारी।
सदा  - सदा में शरण तिहारी।
तुम बड़े गरीव निवाज।
तुम बड़े गरीब निवाज।
रघुबर तुमको मेरी लाज।
रघुबर तुमको मेरी लाज।
तुमको मेरी लाज ,
रघुबर तुमको मेरी लाज।
रघुबर तुमको मेरी लाज,
रघुबर तुमको मेरी लाज  - - - - -
पतित उधारन विरूद संवारे।
पतित उधारन विरूद संवारे।
ता श्रावण न सुनी आवाज।
ता श्रावण न सुनी आवाज।
हो तो पतित पुरातन कहिए।
हो तो पतित पुरातन कहिए।
पार उतारो जाहाज  - - - --
रघुबर तुमको मेरी लाज।
रघुबर तुमको मेरी लाज।
रघुबर तुमको मेरी लाज।
रघुबर तुमको मेरी लाज।
सदा  - सदा में शरण तिहारी।
सदा  - सदा में शरण तिहारी।
तुम बड़े गरीब निवाज।
रघुवर तुम बड़े।
गरीब निवाज, रघुबर तुमको मेरी लाज।
अगखण्डन दुख भन्जन जनके।
अगखण्डन दुख भन्जन जनके।
यही तिहारो काज।
तुसली दास पर कुपा करिय।
तुलसी - - - - -
भक्तिदान हेतु आज।
रघुबर तुमको मेरी लाज।
रघुबर तुमको मेरी लाज।
रघुबर तुमको मेरी लाज।
सदा  - सदा में शरण तिहारी।
तुम बड़े गरीब निवाज।
रघुबर तुम बड़े गरीब मिजाज।
रघुवर तुमको मेरी लाज  - - - - -
रघुबर तुमको मेरी , तुमको मेरी।
तुमको मेरि लाज।

 

 

 

 

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11) राम गुन गाये से
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राम गुन गाये से।
राम गुन गाये से।
राम गुन गाये से।
तेरी बन जायेगी राम गुन गाये से।
तेरी बन जायेगी राम गुन गाये से।
राम गुन गाये से ,राम गुन गाये से।
राम गुन गाये से,

तेरी बन जायेगी राम गुन गाये से।
धुरव की बनी प्रहलाद की बन गयी।
धु्रव की बनी प्रहलाद की बन गयी।
द्रोपदी बन गयी, द्रोपदी की बन गयी।
चीर के बढ़ाये से  - - -।
द्रोपदी की बन गयी चीर के बढ़ाये से।
तेरी बन जायेगी राम गुन गाये से ।
राम गुन गाये से ,राम गुन गाये से।
राम गुन गाये से ,राम गुन गाये से।
राम गुन गाये से,

तेरी बन जायेगी राम गुन गाये से।
ब्रह्मा की बन गयी , विष्णु की बन गयी।
ब्रह्मा की बन गयी , विष्णु की बन गयी।
मोरध्वज की बन गयी।
मोरध्वज की बन गयी आरती उतारे से ।
मोरध्वज की बन गयी आरती उतारे से ।
तेरी बन जायेगी राम गुन गाये से ।
तेरी बन जायेगी राम गुन गाये से ।
राम गुन गाये से ,राम गुन गाये से।
राम गुन गाये से ,राम गुन गाये से।
शबरी की बन गयी, अहिल्या की बन गयी।
शबरी की बन गयी, अहिल्या की बन गयी।
नारद की बन गयी , नारद की बन गयी।
बीणा के बजाये से।
नारद की बन गयी बीणा के बजाये से।
तेरी बन जायेगी राम गुन गाये से ।
राम गुन गाये से ,राम गुन गाये से।
तेरी बन जायेगी राम गुन गाये से ।
राम गुन गाये से ,राम गुन गाये से।
राम गुन गाये से ,राम गु
न गाये से।

 

 

 

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12) No Lyrics
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