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Ram Datt Joshi, Gram Pradhan

 सुबे की प्रभाती
 

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श्री राम दत्त जोशी,  ग्राम पुनोली, पट्रटी चलसी, पी.औ.  मुलाकोट, ज़िला पिथौरागढ़: मैं सुबे  की  प्रभाती सुना  रहा  हूँ और  सत्तरि  साल  की  उमर  है, दांत  एक  भी  नहीं  है। इस  से  आवाज  कुछ  खराब होगी, इस  से  मैं  सुनने  वालों  से  क्षमा  मागूंगा।

 

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हिन्दी संस्करण                            English Version

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हे.... सूनी लिया हो पन्चनाम देवा, भोल की भेल्यौला,
भोला की भोल्योला होली पे तुमरे नाम की हे...
चन्दा न ला सूरी जो काटु पै, रथा चली गया हे...
सुलाछीना नारी देवा पै बच्वोला बनी गैछ,
ठाड़ा उठी ला बेरा सुलाछीना, हाथा मुखा घ्वेली हे...,
तामा की ओ घड़ुली नारी षिरा धारि हो लेली,
सकल गड़ुवा सुलाछिना हाथा पैला हो लेली,
हीटनी ओ रीटनी नारी नहैगै नौ पाटी नौवली,
नौ पाटी नवाली नारी पै नाई धोई हो लेली,
नाई धोई बेरा नारी देली सूरजों अरघ,
तामाँ की घड़ुली नारी पै जला भरी हो लेली,
सकल वो गड़ुवा माँजु योजला भरी हो लेली,
औना-औना आंगै सुलाछीना देवी का मन्दीरा,
देवी का मन्दिरा नारी यो फवांली लै साली।
गाई का गोसाला बठी लांगे गाई को गोबरा,
गाई का गोबरा नारी मन्दिरा लीपी हो लेली,
मन्दीरा लीपली नारी पैं दीयड़ी जलाली,
नौं तीलों को तेल ओ नारी, हिड़ो नौ कपूरी
साली का अक्षता लेली पैं गाई को घीरता,
क्यारी माँजा उ जाली नारी पैं।
यो फूला बीनि हो लाली,
ताजी-ताजी फूलों ले सुलाछीना कुरी भरी लाली,
देवी का ओ मन्दीरा नारी पूजाना करली,
धूपैकी हो बंसंगाँ देली नारी अन्न की रसाना,
अन्न के ओ रसैनाँ नारी धूपै की वसंगाँ,
विश्णू लोक जाड़ि नारी पैं तेरी धूपै की वसंगाँ, संग हे ...
पांव रिसमली नारी पेड़ बटुली छ ली जो गैछ हो,
औना-यौना आँगै सुलाछिना आपना मकाना हे
आपना पति की नारी पांव धोइ जो लेली हो,,
पाऊ धोई बेर सुलाछिना लेली चरणा मृत हे....
आपना पति की नारी परिक्रमा करि जो लेली हो,
देवा का मन्दिरा माँजो यो लीपी घैंसी लेली....।
धूपै की वसंगाँ देली नारी अन्ना की जो रसंना हो।
बाला कैं बोत्याली नारी यो बूड़ा कैं हंसाली हे....।
सुलाच्छिना नारी कनि देबा, देला बर उ दाना हो।
त्वे नारी मीली जावो कोलो पति को श्रंगारा हे....।
अन-धन भण्ड़ार नारी त्वे मिली भल जालो हो  
त्वे नारी मिलि जावो कौला, गोदी मै को बाला हे...।
सात कुला पितर त्यारा बैकुण्ठा तरि जो जाला हो  
किंचक तिर मौंली आबा मुँगरा खुली गया हे...।
बाटा को, बटाव देवा पैं वाटा चली जो गया हो
जोगी ला भगौती की जो नांद चली रैछ़ हे..।
ब्रह्मा घर बेद चल देबा, क्षेत्रीघर राला खांड़ हो।
जोगी घर नाद बाजी, यो गंगा ना जमुना हे...।
गंगा ला जमुना देवा पैं नीर चलि जो गया हो,
देवों कां दडव़ारा माँजा यो शंखा बाजी रेछ हे।
उचिना कैलाष माँजा
शिवाजी का भोग चलि जो रया हो।
तैतीस करोड़ लीगांन की पूजाना चलि गैछ हे।,

 


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