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Home Religious Songs Ram Datt Joshi Airi ka Jaagar K
Jāgar for Aiṛī Devatā

Jagariya: Ram Datt Joshi, Gram Pradhan Gogana/Punauli, Patti Chalsi, Kali Kumaon   
Dungariya: a ploughman.
Earlier in the evening Ram Datt had sung an evening song or sanjya which is usually sung before a jāgar. The phāg which normally is sung by four men after a sanjya but before a jāgar had been sung the previous evening. This jāgar was sung to be recorded and for my benefit however it was a real jāgar in the sense that towards the end Aiṛī Devatā manifested in the dungariya and blessed all those present.

The Jagariya was accompanied by two holiyār or secondary singers. The Dungariya or medium sat on a folded blanket (called āsana [आसन], āśaṇa [आशंण], or sīṇgha [सिंघ]) opposite the Jagariya. A brass thali or plate containing; incense, rice, flowers, fruit and embers, which forms a shrine to welcome the Devatā, is placed in front of the Dungariya.

 

 

 

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हिंदी संस्करण

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नाराँन ईष्वर कुलदेवता।
दाँन है मलिकेा दिश्टांग दिये हो
परमेश्वर भगवान।

ओ.... सुनि लिये त्यौना बीरा, त्यौना कृष्णा अवतारा हो
कृष्णा त्यौना बीर वे....।
ओ त्यौना जाते त्यौना बीरा... सुनि लिया कृष्णा अवतारा हो।
आ त्यौना बीर वे....।
ओ मथुरा नगरी त्यौना.... । वहला बुड़े वासु देवा हो....।
आ त्यौना बीर वे....।
सत्र विवाह बरा बसुदेवा का मन खिया निमता हो....।
त्यौना बीरा वे।
अठारौं विवाह करो त्यौना देवा कि काथा आसा हा।
ओ त्यैना वीर वे...।
ओ ऋतु गै पलाटी दो देवाकी फूला वैठी गै छा हो....
अंगा भारी मै छा।
देवाकी पांऊ ढीला भौच्ह है....।
ओ एका दुई मासा दो ...... देवा कि
तीना चारे मासा हो पाच-छै छैई मासा।
देवाकी सातों मासा लागा हो....।
वहो साते आठां मासा दो देवाकी नवे-दषा मासा हो।
वहो देषा मासा देवाकी ऐडि़ज्यू पूरा भनई गया हो....
देषा देषा मासा पूरा दो देवाकी को बाला हैगे पैदा हो,
पैदा हुना-हुना बाला कैं सुपा धीर लेछा हो....।
वो बूड़ा बासू देवा दो लिगै ल्वै तारान बालो हो...।
सुना ऐड़ी देवा...। बाला गै कंस कोट मांजा हो।
ओ कंस कोट मांजा दो देवा पापी न कंस कार हो
ल्वे तारानो बालो...।
बसदेवज्यु ले आतै सौंपी देछा हो...।
वो हरि देवा नांराना दो ...।
कंस बोला बाली गौछ हो...।
सुना बासु देवा। तुमा सुना मेरी बाता हो...।
ओ आठना गरभा दो आकाषवांणी लै कंसे मुमि बतायो...।
आपना बालका तुमा वापिसे लीई जाया हो...।
ओ बूड़ा बासूदेवा देवा खुसी बनी गयो ल्वे
तौरान बालो देवा सूपा धरि ले छा.....।
ओ सूपा धरो बालो देबा बाटा लागि गैयां...।      
हीटना-रीटना न्हैगै बाटी याघा बीचा...।
ओ तैधडि़ का वो बीचो आंगै ऋखी ना नारादा...।
ऋखी ना नारदा ऋखी बोला बोली गया।
ओ सुना राजा कंश स्वोला सुना मेरी बाता।
योईना बालाका त्वैले वापिसी भेजछा...।
ओ ऋखी नाबु नारदा गाड़ो धूला तेया चौकी।
आठ रेखा खेंचिया देवा धुला तेया चौकी।
ओ वाला टुका है गनाला बना पाला टुका आठा। 
पाला टुका है गनाला ऋखि वाला टुका आठा     
ओ वलि पलि बठै गनाला बना बीचे ओ मांजो आठा,
कोई ना उ बालाका कंशा त्वैई मूंली होला।
ओ बूड़ाना बासूदेवा न्हैगे बाठी अदाबीचा,
पीपी ना कंशा इनका पाछा पडि़गया,
ओ बाटि अदवीचा जायाका बालो लूटी ओ बालो लेछा।
लौना लौना लांगे कंशा कंशकोट मांजा।
ऐड़िज्यू दाँन समाँ हाथो बालाको बौंसमायो पैरो।
देबा तोईना बालाका कंशली सात पेरा घुमायो,
बालो सिला लै मारिया दो...।
ओ हरी नाराँना... वासुदेब जयू ढले हाला रो ला हो...।
देबा मना छै। छै मना का।
बासुदेवजयू नेतरे ढलला ला देवा सौनिया भदोइया।
आंखों दै वारीसा ग्री रैछो।
देबा रूनाना विलाना बासुदेवज्यू पाताल लागे गैया।
कोनि आज तक ठीक छियो पुतरे को शोका।
दिलमें आज हैइ योढा वे ऐड़ी राजा वे
रूना-विलाना बाटै लागि गैया।
मासा बीति गैया ना नारायना अऐ ऋतु गे पलटी हो...।
यो रानी देवाकी नारायना फूला वैठी गैछा.... हो।
ऐका दुवे तीने मासा नारायना चार-पांचा मासा हो......
छैई-साता मासा भई देबाकी आठ-नौई मासा...। 
दषा मासा पूरा पै नारायना बालो हैगै पैदा हो.....।
ल्वे तौरान बाल बसुदेव ज्यू ले सूपा धरी लेछा..... हो।
देवा तैइना विधिलै कंशा ले तैईना बाला को
देवा दाँन समाँ हाथो कंशा ले बौ समायो पैरो,
बालो सात फेरा घुमायो, आंजि सिललाँ मारीयादो....
हरी नारायाना, वासु देवज्यू ढला हाल रोला...हो...।
एक आँखी सौलिया लागी नारायना एक आंखी भदोरी...।
बुड़ा बासुदेवा नारायना बाटूली छली रया......। 
तईना विधि ले नारायना कंशा ले देवाकी का बाला हो...।
साते ना पुतरा कंशा सेलि सिललां मारिया हो...।
ऋतु गै पलटी ऐड़ी देवा देवाकी फूलै बैठी गैछा हो...।
आठों गरभा देवाकी को भै गराभा वो बासा...।
आठों ना वो गराभा देवा भै पे गराभा हो बासा। 
आठों गराभा देवाकी का होरे रंगा हो ढंगा।
सिरा मांजा देवाकी का दो जानि जेठा का सूरीजा।
राजाना कंगंसा राजा आंगे देवाकी कोठड़े।
ये ही जामा गुफा में कौलो कगंशा मेरो होलो डो काला।
आजे का गराभा देवाकी को होड़ा रंगा होला।
पापी ना ओ कंगंसा राजा का आजि क्या छे समा हो छरा।
देवाकी बासूदेवा निथा के बन्दा बना कोताड़े।
जाईना ओ कोताड़ी लागिरे यो लूवा का फाटका।
जाईना कोताड़ी लागिरै पै बजरा का हो ताला।
पांचना ओ महिना देवाकी यो छियो गरभा हो वासा।
पंचनामा देवा कानी एलै भौता दुखा हो दे छा।
एसी माया भगवानों ले तो फैला बालो हो देछा।
पचौ महिना को गरभा गाड़ी गोकुला नगंरी।
गोकुला नगंरी गरभा धरो रोहणी का हो पेटा।
तवा हा जाती नारायना त्यूले यो पांचाना महिना।
कृष्णा भगवानों ले लियो गरभा देवाकी गर्भा....।
सुना-सुना ऐड़ी देवा, देवा पंचना महिना हो,
आ त्यौना बीर वे।
ओ पंचना महिना कृष्णा जूले लिओ गरभे वासा हो।
ओ हाँ रे नारयना देवा पाचा महिना बन्दी खना ढला हो,
त्यौना बीर वे।
बाँसा डयोड़ी मांजू लगा
कंसा ले सिपांही की ड्यूटी हो।
आ त्यौना बीर वे।
वो कि धन्दा करलो कंषा,
देबाकी को गर्भ कै लीभेर दे दि दे राला हो.....।
आ त्यौना बीर वे।
ओ कग्ंशाना कोटे मांजू कग्ंशा मकान उ लगालो।
छे: मना सीसा के आले घड़ूली बनांछा।
ओ छ: मन ओ लुवा की कग्ंषा सिरौड़ी वो बनांछा।
देवाकी गी वो पासो कग्ंशा जोलिया भेजाछा....।
ओ आंदिये आंदिये बैना पानी या सारना,
मेरी लागी रयो बैना नया जो मकाना,
ओ रूनी ना ओ बिलानी देवाकी बाटा लागी गैछा,
जाना जाना नेगै देवा कग्ंशे कोटे मांजा,
ओ भलो करो बैना दो आंछै बैना पार्नाना सारना हो,
सैमना घढुली कग्ंश सेली हाथे परा देछा हो....। ।
ओ सेमनो सिरौनी दो, देवाकी का सिरे में धरैछा हो, 
एसि माया फैला छै, त्यौना घु़ली बनी गै
घुड़ुली तुमड़ी को फूला हो....।
ओ छे: मना सिरौऩी दो हैगे त्यौना तुमड़ी को फूला हो....।
लुडा तुली चाला, देवाकी न्हैगे जमुना का घाटा हो....।
ओ छे: मना घुड़ुली दो देवाकी भरना लागी रेछो....।
सारी ना जमुना देबा घड़ुली समी गैछा हो....। 
ओ यथ उथा सुजाली दो....।
ऐड़ज्यू ऊ रानी देवाकी हो....
कै विधी उचौलो कौली छ: मना घड़ुली हो...।
ओ क्वै जसन‍रं देखो दो छोरि घड़ुली उचौना लागैछा हो...।
इस माया फेलांछ भगवानुली घड़ुली तुमड़ी को फूला हो...।
ओ शमना वो घड़ुली छुरि ख्वारा ओ ध्रि लेछा।
लूड़ा तूड़ी चाल ओ आगै कंश कोटे मांजा।
ओ शमाना ना उ घड़ुली देवाकी बिसाना वो पैगैछा।
घड़ुली विसा दे ना आगै उ पापी कंगासा।
लौटा दे घड़ुली बैना पिरी वो पानी लाली,
घड़ुली लौटाली देवा सारी ना जमाना।
ओ सारी ना वो जमूना चलिगै कंश कोटा मांजा।
पापी ना कंगसा आजि हाथा जोड़ी बेरा,
थमा थमा, बैना कौलो कंगसा घड़ुली को जला हो...।
सारी कंगशा कोटा दो कौलो बगी भलो जेछा हो...।
घड़ुली को जल बैना तूईए रोकी दिये हो...।
ओ छै माना घड़ुली देवाकी लेढा जल रोकी लेजा हो...।
जा बैना, जा बैना कलो आपना तिमैं जले जरूरता हो...। 
जाना हुना कंगसा दो कौली पै तेरा भल्यामा हो...।
बाटा लागी देवाकी आगे मथुरा नंगरी हो...।
सातों ना महीना दो हैगे गरभा नाको वासा हो...।,
बजारे का ताला कंगसे का लुवा का किवाड़ा हो...।
सात कोठी भितरा दो वासदेव देवाकी बन्दे कारे हाला हो...।
दषा लै आंगुली द वासदेवज्यू का बीसे रोपा स्यूड़ा हो....।
हाथा हथ गड़ी दो पैरा पैरों माजा नेला हो....।
कड़ा मैं घंजीरा बासदेवज्यू पैरा कोटो जनाजीरा हो....।
ओ दूताना राक्षसी दो इनरा पौरा बैठा देछा हो।
बाँस जोड़ा सौकियों की वढा ड्यूटे लागी रैछा हो...।
कोले मौला होलो दो देवा खूना दन्ता हाथी हो...।
आंगना की ड्यूटी घिर्ढके घर्ढकी जुहोली हो....।
आहता नैये दषा दो मासा देवाकी का पूरा बनि गया हो....।
सुनि लियै ऐड़ी जयू तुमा कृष्णा अवतारा हो...।
दष मासा पूरा दो भगवाना गरभा को बाल हो....।
सुना-सुना इजू तुमा सुना मेरी बाता हो....।
वो पैदा हुना-हुना दो मैं पुजा दिया गोगुला नंगरी हो....।
गोगुला नंगरी जसौदा माया की कन्या हेरे पेदा हो....।
ऊ कनी या हुना को दो जसौदा के पतनाघन हो...।
बुड़ा बासुदेवा,
अजे रूना छे विलाना हो....।
ओ दषना आंगुली मेरा बीसा छना स्यूड़ा,
हाथों हथगड़ी मेरा पैरों मांजा न्याला.....।


At this point the cassette finished and, although I had quickly inserted a new cassette to continue recording, Ram Datt gestured towards the dungaria, who was trembling with a beautific smile on his face, and he said: "Airi Devta's avatar has manifested and there is no need to continue". Then the women and children came and knelt before the dungaria to receive Airi Devata's blessings and a tikka of ash on their foreheads; after them the men received the same blessings.

 

 

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Later Ram Datt told me the end of the story:

In the middle of that stormy night Devaki gave birth to a Krishna. Then suddenly Lord Vishnu appeared and said he had come to rescue them and the people of Mathura and that Vasudeva should take the newborn baby to his friend Nanda in Gokula. At the same time the chains and fetters fell off Vasudeva and he placed the newborn baby in a winnowing basket. The locks and bolts on the iron doors opened, the twentytwo guards, the demon Dūtnī and the bloody-tusked elephant were sleeping on their feet. Vasudeva set off with the winnowing basket on his shoulder and went to the bank of the Jamuna river which was a raging torrent. As if by magic the river parted and, protected by Lord Vishnu, Vasudeva crossed and went to the house of his friend, the cowherd Nanda in Gokula where Nanda's wife Yashoda had given birth to a daughter. Vasudeva left the baby Krishna with Yashoda and returned with the newborn baby girl in the winnowing basket, the Jamuna parted once again, and so Vasudeva returned to the prison where the chains and shackles once again bound him. The locks and bolts on the iron doors and gates slammed shut, the bloody-tusked elephant, the demon Dūtnī and the twentytwo guards were immediately wide awake and they heard the cries of the newborn baby. They reported this to sinful Raja Kans who hurried to the prison. Ignoring the tearful pleas of old Vasudeva and Devaki he seized baby girl´s right hand and left leg and swung the baby round but to his utter amazement the child flew off into the sky and transformed into the fearsome eight armed goddess Yogamaya. She said to sinful Kans: "Oh foolish man! Why would you kill me? Your doom has been born already elsewhere."
Eventually young Krishna killed sinful Kans and freed his parents from prison.

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