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Home Classical Music Churamani Pt2-H
   
 

Churamani Joshi and Durga Datt Joshi
- : -

Classical Music from Gogana Part 2

 

Churamani Joshi: vocals, harmonium

Durga Datt Joshi: tabla

Churamani Joshi was a pandit, astrologer, music master, Ram Lila master, and mini-shopkeeper who offered bedis, matches, soap, biscuits for sale in his tiny shop in Bhanoli at the side of the footpath to Paleri and, eventually the Panar river. Like most village pandits he provided his jajmān or clients with ritual services at birth celebrations, weddings etc. and as an astrologer he would judge the compatibility of potential marriage partners as well as suggest auspicious dates for marriages or other events. Three or four times a year Churamani arranged, produced, choreographed and directed a Ram Lila, a nine day musical enactment of major events of the Ramayan, in local villages.???
A village Ramlila organizing committee is formed and young villagers eagerly compete to take the parts of Ram, Sita, Laxman, the evil Rawan and the ever-faithful, courageous and devoted Hanuman, monkey god . The stage has to be built, costumes made or repaired, parts are rehearsed, lighting and seating arrangements are made until, after some two weeks hard work, the first evening of the Ram Lila begins. After the evening meal villagers make their way to the Ram Lila ground where, young orderlies with sticks ensure women sit on one side and the men on the other in front of the beautifully decorated raised wooden stage which is hung with coulourful cloths and illuminated with hissing kerosene pressure lamps. Eventually, after several welcoming speeches for the guests of honour and villagers from neighbouring villages, the performance starts and continues for nine evenings.
Churamani's music guru was a Nar Singh of Chelchina who in turn, had studied music under his guru in Lucknow from 1912 – 1916. Nar Singh was employed by the Forest Department but left it on his return to Kumaon and dedicated himself to music.

As a young man Durga Datt Joshi durgadattjoshi2was a celā or pupil of music master Churamani Joshi who at that time  lived in his native village near Gogana. Durga Datt Joshi then served in the Indo-Tibetan Border Police for 35 years gaining a B.A. at Gwalior University and becoming regimental tabla player of the Indo-Tibetan Border Police. Although he was offered a teaching position in the Music Department of at Gwalior University, he preferred to retire to his native village of Gogana in 1983. He still organises and performs at two or three Ram Lilas a year and he has a celā who makes good progress at his daily tuition.

The recording was made in December 1984 in the home of Ram Datt Joshi, Gram Pradhan, in the village of Gogana, patti Chalsi, Kali Kumaon, about 60km SE of Almora. Gogana lies in the valley of the Panar river which drains the run-off from the southern slopes of the Mornaula - Devi Dhura mountain ridges.


 The recordings presented here are  Copyright © 2012 Durga Datt Joshi/Ian Coulthard, ℗  2012  Durga Datt Joshi/Ian Coulthard. They may be downloaded for    personal  use only. Any unauthorised broadcasting, public performance,    copying  or re-recording will constitute an infringement of copyright.
 
 English Version
 

1) तेरी दया है अपार - Raaga Kaphi

 
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तेरी दया है अपार- प्रभु तेरी दया है अपार
तु अगम अगोचर अविरल 2
चर अचरिस कल कोतु अधार
अस्तों को उबार। 2
अस्तन को उबार।
प्रभु तेरी दया है अपार।
प्रभु तेरी दया है अपार। 4
दीन अनाथ पथिक और निर्बल
दीन  - - - - - - - - -4
महा पराधी शरणांगत हूँ।
चतुरतिहार महिपार उतार
चतुर तुम्हारे महिपार उतार।
प्रभु तेरी दया है अपार।
प्रभु तेरी दया है अपार।
तेरी दया है तेरी दया है।
तेरी दया है अपार। 4
प्रभु तेरी दया है अपार।

 

 

 

2) प्रथम भैरब राग गावत

 

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प्रथम भैरब राग गावत। 2
भैरब राग गावत।
प्रथम भैरब राग गावत। 4
जागो बंसी वाले ललना।
जागो मेरे प्यारे
जागो बंसी वाले ललना।
जागो मेरे प्यारे।
प्रात: समय उठ, भानु उदय भये।
ग्वाल बाल सब भूपति आये।
तेरे दरस के काज ठाड़े।
उठ - उठ नन्द किशोर रे।
उठ - उठ नन्द, उठ - उठ नन्द किशोर।
जागो बंशी वाले ललना।
जागो मेरे प्यारे।
जागो बंशी वाले ललना।
जागो मेरे प्यारे  - - - - -2
प्रात: समय उठ, भानु उदय भये।
प्रात: समय उठ, प्रात: समय उठ।
भानु उदय भये।
ग्वाल बाल सब भूपति आये।
तेरे दरस के काज ठाड़े।
तेरे दरस के, तेरे दरस के।
तेरे दरस के काज ठाड़े।
उठ - उठ नन्द किशोर रे।
जागो बंशी वाले ललना।
जागो मेरे प्यारे, जागो बंशी वाले ललना।
जागो मेरे प्यारे  - - - - - - - 4

 

 

 

3) गजाननन गौरी के नन्दन।

 
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गजाननन गौरी के नन्दन।
सुमिर सदा सुख दायी।
गजाननन गौरी के नन्दन।
सुमिर सदा सुख दायी  - - - - -4
गौरी के तुम पुत्र लाड़ले।
गौरी के तुम पु़त्र लाड़ले।
गौरी के तुम पुत्र लाड़ले  - - - -4
रिद्धि- सिद्धि भगतारी।
भोले श्ंकर पिता तुम्हारे।
भोले श्ंकर पिता तुम्हारे।
अंग विभूति रमाये।
गजाननन गौरी के नन्दन।
सुमिर सदा सुख दायी।
गजाननन गौरी  - - - - -4
सरस्वती पूजन रात को तुम तो।
वह है बड़ा गुणकारी।
दया धरम को दिल में रखना। 
दया धरम को दिल में रखना। 
गजाननन गौरी के नन्दन।
सुमिर सदा सुख दायी।
गजाननन गौरी के नन्दन।
सुमिर सदा सुख दायी।
सुमिर सदा सुख दायी।
गजाननन गौरी  - - - - -4.

 

 

4) जागिए बृज नन्दराज कुँवर

 
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जागिए बृज नन्दराज कुँवर।
जागिए बृज नन्दराज कुँवर।
जागिए मेरे प्यारे।
जागो बंशी वाले ललना।
जागो मेरे प्यारे।
जागो  - - - - - - -
जागो बंशी वाले ललना।
जागो मेरे प्यारे।
यमुना में गेंद डाल।
यमुना में गेंद डाल।
यमुना में गेंद डाल।
ग्वाल बाल हारे।
यमुना में गेंद डाल।
ग्वाल बाल हारें। 2
काली भू भू कार देत।
काली भू भू कार देत।
श्याम जीत।
जागो बंशी वाले ललना।
जागो मेरे प्यारे   - - - - - - -
जागिए बृज राज कुंवर नन्द के राज।
नन्द के नन्द के नन्द के राज दुलार।
जागो बंशी वाले ललना ।
नन्द के दुलारे।

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5) आऊँ भजन गुण गाऊँ

 
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आऊँ भजन गुण गाऊँ।
आऊँ में अपने ही प्रभु को रिझाऊँ।
आऊँ भजन गुण गाऊँ।
आऊँ भजन गुण गाऊँ।
आऊँ में तुमको  - - - - - - -
गंगा न नहाऊँ   - - - - - - -
यमुना न नहाऊँ   - - -  - -
ना कोई तीर्थ जाऊँ
ना कहीं तीर्थ जाऊँ।
गंगा न नहाऊँ, यमुना न नहाऊँ।
ना कहीं तीर्थ जाऊँ।
ना कहीं तीर्थ जाऊँ।
आऊँ में अपने ही प्रभु को रिझाऊँ।
आऊँ में अपने ही प्रभु को रिझाऊँ।
आऊँ भजन गुण गाऊँ।
आऊँ भजन गुण गाऊँ।
वन ही में जाऊँ
वन फल खाऊँ
ना कोई डाल सताऊँ आ आऊँ।
पाती - पाती में ।
प्रभु जी रमें या आ- आ।
तिन्ही में बलि बलि जाऊँ।
बलि - बलि जाऊँ।
आऊँ में अपने प्रभु को रिझाऊँ।
आऊँ भजन गुण गाऊँ।
भव भंज में गुण गाऊँ।
भव भंज में गुण गाऊँ।
अपने प्रभु को रिझाऊँ।
दवा नहीं खाऊँ।
ना बैद्य घर जाऊँ।
न कहूँ बैद्य दिखाऊँ आऊँ।
पूरे न ब्रम मिले अविनाशी।
न ही में बैद्य दिखाऊँ।
मैं अपने प्रभु को रिझाऊँ।
भव भ्ंज में गुण गाऊँ।
आऊँ में अपने प्रभु को रिझाऊँ।
भव भ्ंज में गुण गाऊँ।

 

 

 

6) कहतै निसाद सुनो रघुनन्दन

 
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कहतै निसाद , कहतै निसाद।
सुनो रघुनन्दन।
कहतै निसाद सुनो रघुनन्दन  आ…..
नाथ न लूँ तुमसे मैं ।
नाथ न लूँ तुमसे मैं ।
तुमसे में नाथ न लूँ ।
तुमसे उतराई आ - आ।
कहतै निसाद, कहतै निसाद।
सुनो रघुनन्दन।
नाथ न लूँ, तुमसें में हर्ज न।
लू तुमसे मैं  प्रभु उतराई।
कहतै निसाद सुनो रघुनन्दन।
नाथ न लूँ तुमसे मैं  नाथ न लूँ तुमसे में।
नाथ न लूँ तुमसे मैं  उतराई ।
कहतै निसाद सुनो रघुनन्दन।
नाथ न लूँ तुमसे लूं ।  4
नदि अरू नाव के, नदि अरू नाव के ।
हम हैं खेवैया आ  - - -
नदि अरू नाव के, नदि अरू नाव के।
हम हैं खेवैया , तुम भव सागर पारै।
तुम भव सागर पारै , तुम भव सागर पारै।
करैया  - - - - कहतै निसाद सुनो रघुनन्दन।
नाथ न लूँ मैं प्रभु तुमसे में उतराई ।
कहतै निसादै ऎ ऎ कहतै निसादै आ आ  - - ।

 

 

7) ताकि हँसते हुए निकले दम

 
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ताकि हँसते हुए निकले दम।
ए मालिक तेरे बन्दे हम ।
ऎसे हों हमारे करम  - - - -
नेकी पर चले और बदी से कहें।
ताकि हँसते हुए निकले दम।
ए मालिक तेरे बन्दे हम।
है अंधेरा छा रहा।
तेरा इन्सान घबरा रहा।
हो रहा बेखबर।
आता है कुछ नजर।
तेरा सूरज छिपा जा रहा है ।

दिया तूने हमें जब जनम । 2
जब जुल्मों का हो सामना ।
तब तू ही हमें थामना।
ओ बुराई करें हम भलाई करे।
ओ बुराई करें हम भलाई करे।

नहीं बदलेगी ऐ भावना।
नहीं बदलेगी ऐ भावना ।
बढ़ उठे प्यार को हर कदम।
तू अमावस को कर दे पूनम।
तू अमावस को कर दे पूनम।
नेकी पर चले और बदी पर चलें ।
ताकि हँसते हुए निकले दम।
ऐ मालिक तेरे बन्दे हम।
ऐसे हों हमारे करम  - - - -
नेकी पर चले और बदी से कहें।
ताकि हँसते हुए निकले दम।


 

 

8) छाड़ों री बैंया, घर जाने दो

 
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छाड़ों री बैंया, घर जाने दो।
डगर - मगर के लोगुवा सुनत हैं ।
डगर - मगर के लोगुवा सुनत हैं ।4
चरचा करति बृज नारियाँ।
चरचा करति बृज नारियाँ।

जाओं जी जाओं जाओं जी जाओं।
जाओं जी जाओं दुंगी में गालियाँ।
छाड़ो मेरी जी मेरी बैंया, छाड़ो जी मेरी बैंया।
घर जाने दो यार घर जाने दो यार।
छोड़ो मेरी बैंया।
मैं अरज करती हूँ। मैं अरज करती हूँ।
मैं अरज करती हूँ। मैं अरज करती हूँ।
डरग मगर के डगर मगर के।
लोगुवा सुनत हैं ।
डगर - मगर के लोगुवा सुनत हैं ।... 4
चरचा करति बृज नारियाँ।
चरचा करति बृज नारियाँ।
जाओ जी जाओ पाओगे गालियाँ मोहन से।
जाओ जी जाओं जी जाओं।
घर जाने दो छोड़ो मोहि बैंया।
घर जाने दो।

 

 
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11) बृंदावन का कृष्ण कन्हैया सबकी आँखों का तारा।
 
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बृंदावन का कृष्ण कन्हैया सबकी आँखों का तारा।
मन ही मन क्यों जली राधिका मोहन तो है सब का प्यारा।
बृंदावन का कृष्ण कन्हैया सबकी आँखों का तारा। 4

यमुना तट पर नन्द का लाला।
जब - जब रास रचाये।
यमुना तट पर नन्द का।
तन - मन डोले कान्हाँ ऐसी।
बंशी मधुर बजावे रे।
तन - मन डोले कान्हाँ ऐसी।
बंशी मधुर बजावे रे।
सुध - बुध खोये खड़ी गोपियाँ।
जाने कैसा जादू डाला।

बृंदावन का कृष्ण कन्हैया सबकी आँखों का तारा।
बृंदावन का कृष्ण कन्हैया सबकी आँखों का तारा
रंग सलौना ऐसा जैसे छाई घटा हो सावन की।
रंग सलौना ऐसा जैसे छाई घटा हो सावन की।
तेरी मैं तो हुई दिवानी मन मोहन मन।
भावन की - - - - -
तेरी में - - - - - - - -
तेरे कारण देख साँवरे छोड़ दिया मैंने जग सारा।
बृंदावन का कृष्ण कन्हैया सबकी

 

 
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